खुद को मुझसे दूर कर क्या आशिकी मिटाओगी, गैरों से तू मिलती रह, ना मुझको भूल पाओगी, फूल सा समझ के तुमने कितनी बार तोड़ा था, गुलाब भी रहा नहीं क्या मुझको तुम सुखाओगी। वादे तेरे वादे एक खुशबू थे जो उड़ गए, अब देखती तू रह, बंद थे वो गेट खुल गए, पछतावा नहीं कभी, तुझे तेरी करनी पे, जो रोया तेरी याद में, वो प्यार ढूढ़ पाओगी, वो मरहम सी बातें तेरी, भूलू... कैसे यादें तेरी... ये तुझको नहीं पता कि तू बन गई कहानी मेरी.. प्यारी प्यारी बातों को कहां लेकर तुम जाओगी, तेरा, दिल जो पूछेगा मेरी, उसे कैसे बताओगी दिलरुबा तू दिलरुबा, दिल के कितने करीब थी, बस मां को बोलना ही था कि तू मेरा नसीब थी, इन इश्क वाली बातों से ही तड़पा कितनी बार हूं, तूने, खुद चुनी है राहें, क्या अकेले चल पाओगी। कहना नहीं है मुझे, बस करता फरियाद हूं, जो मुझसे बेहतर मिलने पर उसे मुझसे मिलाओगी। वो मरहम सी बातें तेरी, भूलू... कैसे यादें तेरी... ये तुझको नहीं पता कि तू बन गई कहानी मेरी.. मेरी सांसों में बसी वो खुशबू तेरे नाम की, आंसू जो बहा दे वो बंसी के किस काम की, तूने चीट भी किया, तब भी तू मेरा प्यार थी, अब सोच लेना बेटा क्या तू इतनी हकदार थी। वो मरहम सी बातें तेरी, भूलू... कैसे यादें तेरी... ये तुझको नहीं पता कि तू बन गई कहानी मेरी.. मेरे साथ है जो की, क्या सबसे जिद निभाओगी, जिन रास्तों पे संग चले क्या उनको भूल जाओगी , खबर नहीं है कुछ तुझे अभी तू नादान है, जो सोने तुझे देगा ना वो मेरा ही ख्याल है, तुझे मेरी कदर एक पल तो याद आएगी, मै हार के सब बैठा हूँ, उन प्यारी प्यारी बातों में, किसी प्रिय के है संग बागान तक तो जाओगी, गुलाब तेरे बालों में, क्या फिर से तुम लगाओगी। वो मरहम सी बातें तेरी, भूलू... कैसे यादें तेरी... ये तुझको नहीं पता कि तू बन गई कहानी मेरी..