हमरे सैयां निकरे बड़े कमाऊ
देख उन्हें मैं फूली नहीं समाऊ
तुमरे बिन मैं कैसे ये रैन बिताऊ
नैन मिले छतिया से लग जाऊ,
हमरे सैयां निकले बड़े कमाऊ
देख उन्हें मैं फूली नहीं समाऊ...
दिल्लगी ये कैसे तुम्हें बताऊ
तुमरे बिन ख़ुद से ही घबराऊ,
हमरे सैयां निकरे बड़े कमाऊ
देख उन्हें मैं फूली नहीं समाऊ